कर्नाटक में “कैंटीन राजनीति”

  तमिलनाडु में जयललिता द्वारा गरीब वर्ग के लोगों के लिए ’अम्मा कैंटीन’ नाम तहत सस्ता भोजन उपलब्ध कराने की शुरुआत की गयी थी। यह योजना कुछ ही दिनों में देखते ही देखते लोकप्रिय हो गई। तमिलनाडु की राजनीति में सस्ते कैंटीन का यह दावं मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। तमिल मतदाता  ’अम्मा केंटीन’ पर फिदा हुए और जयललिता के दोबारा सत्ता में आने में ’अम्मा कॆंटीन’ ने महत्वपूर्ण पात्र निभाई थी।

     बाद में अन्य राज्य सरकारों ने भी ’अम्मा कैंटीन’ से प्रेरणा लेते हुए इस फार्मूले को अपनाया, पिछले दिनों चुनाव से ठीक पहले कर्नाटक के सत्ताधारी कांग्रेस सरकार द्वारा “इंदिरा केंटीन” नामक योजना प्रारंभ की गयी है इसके तहत बेंगलूर महानगर पालिका के १९८ वार्डो में “इंदिरा कैंटीन” खोले गए है। इसके लिए सरकार ने बजट में १०० करोड रूपए भी कराए गए है। जाहिर है चुनाव से पहले यह दावं इसलिए खेला गया है जिससे प्रदेश में दुबारा सत्ता में आने में मादा मिल सके।

     बेंगलूर शहर में खोले गए कर्नाटक सरकार की रियायती खाने की इंदिरा कैंटीन में लोगों को पांच रूपए में नाश्ता  और १० रूपए में दोपहर तथा रात का खाना मिलेगा। पिछले अगस्त महीने में १६ तारीख को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने “इंदिरा कैंटीन; का उद्घाटन किया। बेंगलूर शहर के विभिन्न वार्डों में शुरू हुई इंदिरा कैंटीन में सुबह ७-३० बजे से १० बजे तक ५ रूपए में नाश्ता के वक्त इडली, पुलियुगर, खाराबात, पंगल, रवा किचडी, चित्रान्ना, वांगीबात और केसरीबात खाने के लिए मिलेगा। दोपहर १२-३० से ३ बजे तक और रात ७-३० से ९ बजे तक भोजन में अन्न(राइस)सांबर, कर्डराइस, टमोटोराईस , चित्रान्ना, वांगीबात और दर्शनी पलाव भोजन लोगों को मिलेगा।

     बेंगलूर द्क्षिण भारत के बड़े शहरों में से एक है । जहां करोडों की संख्या में लोग रहते है। यहां लाखों की संख्या में कामकाजी लोग है। निर्माण कार्य में और दिहाडी जैसे कामों में बड़ी संख्या में मजदूर लगे है। शहर के फुटपाथों पर छोटे-मोटे धंधा करने वाले और ऑटो रिक्शा चलक, टेक्सी चालकों की संख्या भी  लाखों की संख्या में है। यहाँ रोजाना बस और रेल से १० लाख से ज्यादा लोग आया-जाया करते है। ऐसे में इन सभी लोगों को “इंदिरा कैंटीन” एक वरदान की तरह है इससे यहाँ के आम लोग सिर्फ २५ रूपए में नाश्ता और दो वक्त का खाना खाकर अपना पेट भर सकते हैं । एक सर्वे के अनुसार वर्तमान मैं २ लाख लोगों ने इन कैंटीनों का लाभ लेना शुरू कर दिया  है।

     बेंगलूर शहर में इंदिरा कैंटीन दिनों-दिनों जनप्रिय होते देख सिद्दरामय्य सरकार ने इस कल्याणकारी योजना को प्रदेश भर विस्तार करने की योजाना बनाई है। पूरे राज्य में इंदिरा कैंटीन स्थापित करने की योजना तैयार किया गया है। इस योजना के अनुसार राज्य के एक लाख अथवा उसे अधिक जनसंख्या वाले शहरों और कस्बों में इंदिरा कैंटीन शुरू किया जाएगा । नये साल एक जनवरी २०१८ से आरंभ होने वाले इस योजना में तालुक मुख्यालयों को भी शामिल किया गया है जिसके तहत राज्य के १७१ शहरों में २४६ स्थानों पर कैंटीन खोली जायेगी । इसी तरह से राज्य भर में अस्पतालों, बस स्टॉड व रेलवे स्टेशनों के पास कैटीन खोलने की योजना है, इन कैटीनों में सुबह का नाश्ता और दोपहर व रात का भोजन परोसा जाएगा। इन कैटीनों का शुरूआत विधानसभा चुनाव की तीन महीने पहले होगी जिसका चुनावी नतीजों पर प्रभाव पड़ना तय है।

राज्य सरकार के इस कदम के बाद कर्नाटक में “कैंटीन राजनीति” का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेसी सरकार द्वारा शुरू किए इंदिरा कैंटीन के मुकाबले में जनता दल (ध) ने भी कैंटीन आरंभ किया है। जेडीएस के सुप्रिम नेता व पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौडा के नाम पर शुरू किए गए  कैंटीन को “अप्पाजी कैंटीन “ का नाम रखा गया है। बंगलूर शहर के जहां वोक्कलिगा समुदाय बाहुल्य है और जनता दल(ध) के पार्षद है उन वार्डों में “अप्पाजी कैंटीन” आरंभ किया गया है। इन कैंटीनों  में गरीब लोगों को सस्ता दर में १० रूपए में रागिमुद्दे और सार अथवा तट्टी इडली दिया जाएग। ५ रूपए में केसरीबात और ३ रूपए में कॉफी मिलेगा। अगर “अप्पाजी कैंटीन” सफल हुआ तो जेडीएस नेताओं द्वारा इस योजना का विस्तार राज्य के  अन्य जिलों में किया जा सकता है।

     कर्नाटक विधानसभा का चुनाव अगले साल अप्रैल महीने में होने वाला है। चुनाव के लिए अभी पांच महीने बाकी है। लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने अभी से ही मतदाताओं को लुभाने में जुटे है।

सिद्रामप्पा मावनूर, लेखक कन्नड के वरिष्ठ पत्रकार है - 8105315394