छत्तीसगढ़: बेटी को दहेज में दिए जाते हैं 9 जहरीले सांप

कवर्धा. बेटी को शादी में उपहार देने के लिए लंबी खरीदारी होती है। पूरा परिवार जुटा रहता है, लेकिन कवर्धा के बोड़ला विकासखंड के बांसाटोला गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर सपेरों की बस्ती की परंपरा जुदा है। यहां बेटी को उपहार में टीवी, फ्रिज, सोना चांदी नहीं बल्कि 9 सांप दिया जाता है। शादी से पहले जब कोई पिता अपनी बेटी के लिए अच्छे वर की तलाश करता है तो धन दौलत नहीं, बल्कि जहरीले सांप पूछता है। जिसके पास ज्यादा जहरीले सांप होते हैं, वही अच्छा वर होता है।

गौरिया समुदाय

जिला मुख्याल से करीब 30 किलोमीटर दूर बोड़ला विकासखंड के बांधाटोला गांव से दो किलोमीटर आगे गौरिया समुदाय की बस्ती है। आसपास के क्षेत्रवासी इसे सपेरों की बस्ती कहती है, क्योंकि यहां हर घर में जहरीले सांपों का बसेरा है। बड़े-बूढ़े ही नहीं यहां के बच्चे भी खतरनाक सांपों से खेलते हैं। सांपों के साथ खेल-खेल में बड़े होने के बाद जब बेटी के विवाह का समय आता है तो यही सांप दहेज में दिए जाते हैं। गौरिया समुदाय में बेटी के विवाह पर पिता अपने दामाद को 9 सांप दहेज में देता है, ताकि उसका दामाद अपनी आजीविका चला सके। 

सांपों का उपहार 

इस समुदाय मे सांपों का उपहार ही दहेज है। पुरखों से चली आ रही इस परंपरा के बारे में फूलचंद, बेदबाई और सुखमेला ने बताया कि यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। हमारी शादी जब हुई तो हमें भी उपहार स्वरूप सांप मिला था, ताकि हम अपनी आजीविका चला सके। 

रोजगार का साधन 

मुख्य सड़क से करीब दो किलोमीटर पगडंडी से होते हुए इन सपेरों की बस्ती तक पहुंचा जा सकता है। चंद घरों की इस बस्ती में हर घर में अनेक प्रजाति की सांप देखने को मिल जाएंगे। यहां के बच्चे बचपन से खिलौनों की जगह सांप के साथ खेलना शुरू कर देते हैं और देखते ही देखते सांप ही इनके खास साथी बन जाते हैं। बच्चों को बचपन से ही सांप पकड़ना के गुर सिखाए जाते हैं। 

नाग पंचमी

बस्ती में रहने वाले समुदाय के मोतीराम और लालजी ने बताया कि पहले वे अमरकंटक मार्ग के कोटा परिक्षेत्र के जंगल में रहते थे। वहां इनका डेरा था, लेकिन अब पिछले कई साल से यहां निवासरत हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही समुदाय के लोग रोजी रोटी के लिए निकल गए। पिटारे में सांप लेकर सभी परिवार अलग-अलग क्षेत्र में गए हैं, जहां नाग पंचमी को सांप का प्रदर्शन कर कुछ पैसे कमा सके।