नोटबंदी पर लोगों में भ्रम फैलाकर राष्ट्रीय हितों को अनदेखी कर रही है कांग्रेस: बीजेपी

जयपुर: बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने नोट बंदी के फैसले का विरोध कर रही कांग्रेस पार्टी पर आम जनता में भ्रम फैलाकर राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. परनामी ने कहा कि केन्द्र सरकार की संवेदनशीलता को देश और विदेश में सराहा जा रहा है. ऐसी स्थिति में जब केन्द्र सरकार जनता को राहतदर राहत दे रही है और जनता खुले मन से इस फैसले के पक्ष में है तो कांग्रेस के आक्रोश का औचित्य क्या है?

परनामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब देश में कार्यभार संभाला था तब देश की जनता से वायदा किया था कि देश में से कालाधन, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को समाप्त कर देंगे. आज जब उसी दिशा में ठोस कार्यवाही करके भारत की अर्थव्यवस्था में दूरगामी सुधार लाने का प्रयत्न किया जा रहा है तो कांग्रेस जैसी भ्रष्टाचार को समर्थन देने वाली पार्टियां इस कदम का विरोध कर रही है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजस्थान की जनता को उत्तर दे कि उसकी कथनी और करनी के बीच में इस अन्तर का कारण कहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं के व्यक्तिगत हित तो नहीं. परनामी ने एक बयान जारी कर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जिस प्रकार का गैर जिम्मेदाराना बयान दिया है, बीजेपी उसकी कड़ी भर्त्सना करती है. देश ने न केवल कांग्रेस को ही खारिज किया है बल्कि उसके परिवारवादी विचारधारा को भी खारिज कर दिया है, इसलिए बौखलाहट में कांग्रेस अपने आक्रोश को जनआक्रोश बता रही है.

उन्होंने कहा कि अगर जनता रूष्ट होती तो कांग्रेस के समर्थन में मुट्ठी भर लोग ही क्यों आते? आम जनता स्पष्ट रूप से नोटबंदी के पक्ष में है और उसने सभी सर्वे और सोशल मीडिया के माध्यम से कदम का निष्पक्ष समर्थन किया है. हमारी राजस्थान की जनता से अपील है कि वो राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानते हुए किसी भी प्रकार के भ्रामक विचार में ना आयें और डटकर भ्रष्टाचार का मुकाबला करने में बीजेपी और प्रधानमंत्री जी की हिम्मत बढायें.

परनामी ने कहा, ‘‘मैं जनता का आभार भी व्यक्त करता हूं कि उन्होंने अपनी सारी असुविधा को नजरंदाज करते हुए नोटबंदी को अपना समर्थन दिया है.’’ इसमें कहा गया है, ‘‘इस योजना का फिलहाल या आंशिक रूप से कुछ क्षेत्रों पर असर पड़ा है लेकिन दूरगामी स्तर पर अर्थव्यवस्था के लिए बड़े फायदों की उम्मीद नजर आ रही है.’’ इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई से एक दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से यह हलफनामा दाखिल किया गया है. इसके अनुसार ‘‘इतने बड़े स्तर पर इतना गंभीर प्रयास पहले कभी नहीं किया गया.

हालांकि 1946 व 1978 में दो प्रयास हुए लेकिन उनका स्तर इतना बड़ा नहीं था.’’ सरकार की ओर से यह हलफनामा अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दाखिल किया है. इसमें सरकार द्वारा 1000 व 500 रुपये के मौजूदा नोटों को चलन से बाहर करने के सरकार के फैसले का बचाव किया गया है. देश की कुल मुद्रा में इन नोटों का हिस्सा 80-85 प्रतिशत है.

इसमें कहा गया है, ‘‘इससे कालेधन का खात्मा होगा जिसने समानांतर अर्थव्यवस्था के रूप में हमारी वास्तविक अर्थव्यवस्था पर बहुत प्रतिकूल असर डाला है. कालेधन की सबसे अधिक मार गरीबों व मध्यम वर्ग पर हुई है और नोटबंदी का सबसे अधिक फायदा भी इन्हें होगा. इससे कर चोरी घटेगी और औपचारिक अर्थव्यवस्था में अधिक लेन-देन होंगे.’ सरकार ने कहा है कि 2000 व 500 रुपये के नये नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं.