घर खरीदने वालों को सरकार का 'तोहफा', पजेशन में देरी पर बिल्डर देगा ज्यादा ब्याज

घर खरीदने और बुक कराने वालों को सरकार ने बड़ा शानदार तोहफा दिया है. केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट कानून से जुड़े नियमों को नोटिफाई कर दिया है. अब बिल्डर की ओर से पजेशन में देरी और खरीदार की ओर से किस्त जमा करने पर देरी, दोनों के लिए पेनल्टी की दर बराबर कर दी गई है. इसका फायदा उन सभी को होगा जो बिल्डर की तरफ से पजेशन में देरी होने पर दोहरा नुकसान उठाते थे. लोग 5-10 सालों तक मकान मिलने का इंतजार करते हैं और उन्हें लोन की किस्त चुकाने से लेकर किराए के घर का किराया भी चुकाना पड़ता है. लेकिन अब ऐसे में उन्हें बड़ी राहत मिलेगी.

अब केंद्र सरकार जल्द ही रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के नियम जारी कर सकती है. यानी नियम लागू होने के बाद कोई बिल्डर ग्राहकों को पजेशन देने में देरी करता है तो उन्हें 10.09 फीसदी के हिसाब से ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा. नियम नोटिफाई होने के बाद से बिल्डर्स की मनमानी व धोखाधड़ी पर लगाम लग सकेगा. ऐसा होने पर घर खरीदने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी. जानिए यहां सारे फायदे

  • पजेशन में देरी पर घर खरीदार अपना पैसा वापस ले सकते हैं
    मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन पॉवरिटी एलिवेशन (हूपा) के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेटरी अथॉरिटी बनने के बाद 3 महीने के भीतर चल रहे प्रोजेक्‍ट को रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा. साथ ही, अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह कितने समय के भीतर प्रोजेक्‍ट पूरा कर लेगा.
  • इसके बावजूद, प्रोजेक्‍ट में देरी और पजेशन टलने पर एसबीआई के एमसीएलआर पर 2 फीसदी अधिक यानी लगभग 11 फीसदी ब्‍याज के साथ घर खरीदार बिल्डर से अपना पैसा वापस ले सकते हैं.
  • पजेशन में देरी पर बिल्डर लगभग 11 फीसदी की दर से खरीदार को ब्याज देंगे और किस्त में देरी पर भी खरीदार को इसी दर से पेनल्टी लगेगी. पहले किस्त में देरी होने पर खरीदारों को 15 फीसदी की दर से पेनल्टी का भुगतान करना होता था.
  • इसके साथ एक और राहत भी दी गई है कि अगर खरीदार रिफंड चाहते हैं तो उनको उसी दर से पूरी रकम पर रिफंड मिल पाएगा. अगर ग्राहक रिफंड का दावा करता है तो बिल्डर को दावा मिलने के 45 दिनों के अंदर पैसा वापस करना पड़ेगा.
  • केंद्र सरकार ने रियल एस्‍टेट (रेग्‍युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्‍ट के रूल्‍स नोटिफाई कर दिए हैं, जिसमें यह साफ हो गया है कि यह कानून उन प्रोजेक्‍ट्स पर भी लागू होगा जिन्हें क्लियरेंस नहीं मिला हैं.

बिल्डर को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
इन नियमों के नोटिफाई होने के बाद हर बिल्डर को राज्य रेगुलेटर के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने के 3 महीने के अंदर डेवलपर्स को जुटाए गए फंड्स का 70 फीसदी एक अलग बैंक खाते में जमा कराना होगा. इस नियम का फायदा यह होगा कि डिवेलपर्स अपना फंड किसी और प्रॉजेक्ट्स में इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, जिससे समय पर निर्माण कार्य पूरा हो सकेगा और लोगों को समय पर मकान मिल सकेगा. डेवलपर्स को किसी प्रॉजेक्ट के रजिस्टेशन के समय यह भी बताना होगा कि कितने समय में वह खरीदार को मकान सौंप देंगे. इससे लम्बे समय से मकान का इंतजार कर रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

प्‍लॉट में भी नहीं होगी हेराफेरी
अगर खरीदार ने प्‍लॉट लिया है तो डेवलपर को बताना होगा कि लेआउट प्‍लान के मुताबिक बायर को कितने एरिया का प्‍लॉट अलॉट किया गया है और घर खरीदार को उतने एरिया का ही प्लॉट पर कब्जा हर हाल में देना होगा.

सबसे पहले केंद्र शासित राज्यों में नियम लागू होंगे 
रियल एस्टेट एक्ट के नियम सबसे पहले केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगे. अंडमान-निकोबार, दमन-दीव, चंडीगढ़, नगर हवेली और लक्षदीप में ये सबसे पहले लागू हो जाएंगे. माना जा रहा है कि दिल्ली में ये नियम एक महीने बाद लागू होंगे. हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, और गोवा, गुजरात राज्य इस प्रोसेस को पूरा करने की तैयारी कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना भी नियम लागू करने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में हैं. महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर महीने में ही ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए थे.