बिल्डर को मिलने वाली छूट का लाभ बायर्स को भी देने की तैयारी

नोएडा अथॉरिटी की शुक्रवार को होने वाली बोर्ड मीटिंग में पहली बार बिल्डरों के साथ-साथ बायर्स को भी राहत देने का प्लान पेश किया जाएगा। नई एग्जिट पॉलिसी के ड्राफ्ट में साफ है कि किसी बिल्डर को यदि अथॉरिटी जीरो पीरियड का लाभ दे रही है तो बिल्डर को भी उसका लाभ बायर्स को देना होगा। इसके लिए बिल्डर अथॉरिटी को बाकायदा लिखित में देगा।


कई सहूलियतें दी थीं


नोएडा अथॉरिटी ने 2007-08 में आर्थिक मंदी के दौर में बिल्डरों को कई सहूलियतें दी थीं। इनमें दस पर्सेंट पेमेंट पर प्लॉट का अलॉटमेंट, इसके बाद दो साल तक सिर्फ ब्याज देने की सुविधा, इसके बाद पहली किस्त देने का प्रावधान, अलॉट हुई जमीन को छोटे-छोटे साइज में कनवर्ट कर बेचने का अधिकार तक बिल्डरों को दिया गया। बिल्डरों ने अथॉरिटी को दो साल बाद पहली किस्त दी थी, लेकिन पब्लिक से अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर दो साल में 90 फीसदी रकम तक ले ली। बीच में एनजीटी व कोर्ट-कचहरी के चक्कर में जब बिल्डर फंसे, तब बायर्स पर न केवल बैंक का कर्ज चढ़ गया बल्कि वे घर की किस्त के साथ-साथ घर का किराया देने को भी मजबूर थे। अथॉरिटी की इसी पॉलिसी के खिलाफ पब्लिक का गुस्सा बढ़ गया। इसे सुलझाने के लिए बिल्डरों का संगठन क्रेडाई भी सामने आया मगर वह भी असरदार नहीं हुआ। अब नोएडा अथॉरिटी पहली बार राहत का पैकेज बिल्डर के साथ ही बायर्स को भी ट्रांसफर करना चाहती है। इसी के तहत प्लान लाया जा रहा है।


अथॉरिटी की प्रस्तावित पॉलिसी में स्पष्ट है कि बिल्डर भले ही 500 फ्लैट के कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल कर ले, लेकिन उसने यदि 300 फ्लैट की कीमत के बराबर की पेमेंट अथॉरिटी में जमा कराई है तो 300 सौ फ्लैटों की ही रजिस्ट्री कराई जा सकती है। यानी कंप्लीशन के पहले एनडीसी लेने के बाद भी बिल्डर का खाता खंगाला जाएगा।


खुलेंगे एस्क्रो अकाउंट


अभी तक नोएडा अथॉरिटी ने इसका प्रावधान सख्ती से लागू नहीं किया था। इस बार प्रस्ताव में एस्क्रो अकाउंट का भी प्रावधान किया जा रहा है। बायर्स द्वारा दी जाने वाली रकम को किसी अन्य प्रोजेक्ट में खर्च से रोकने का यह निगरानी तंत्र बनाया जा रहा है। इस तरह की नजीर वैसे तो सेक्टर-168 में एक बिल्डर पेश कर चुका है। अब बाकी प्रोजेक्टों में भी इसे लागू करने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।