ब्रिक्स के बाद बढ़ेंगी पाकिस्तान की मुश्किलें, भारत तेज करेगा कूटनीतिक हमला

गोवा में रविवार को ब्रिक्स के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी के दौरान भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कवायद जारी रखेगा. साथ ही पड़ोसी देश के खिलाफ अपना कूटनीतिक हमला तेज करेगा. इसके अलावा, आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र वैश्विक प्रतिज्ञा के लिए समर्थन जुटाने सहित सहयोग बढ़ाने के भी प्रयास करेगा.

ऐसे में माना जा रहा है कि ब्रिक्स सम्मेलन के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. क्योंकि, पाकिस्तान लगातार अपनी करतूतों के जरिए बेनकाब हो रहा है. हालांकि, इसकी उम्मीद भी है कि चीन इस मौके का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के पक्ष में कोई दलील दे सकता है. लेकिन, रूस के साथ होने जा रहे करारों के बाद भारत की ताकत बढ़ने वाली है इसी के साथ पाकिस्तान और चीन की चिंताएं भी.रूस के साथ इस समझौते के बाद दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही मात दे देगा भारत !

पांच देशों के समूह ब्रिक्स के इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के नेता भी हिस्सा लेंगे. इस सम्मेलन में आतंकवाद के खतरे से मुकाबले और कारोबार एवं निवेश बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों के नेता ‘ऐसी अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने पर चर्चा करेंगे जो हमारे लक्ष्यों की राह में बाधा पैदा करते हैं.’ मोदी ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘मैं इस बात को लेकर आशावान हूं कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ब्रिक्स के भीतर सहयोग को मजबूत करेगा और विकास, शांति, स्थिरता एवं सुधार को लेकर हमारा साझा एजेंडा पूरा करेगा.’

ब्रिक्स में शामिल पांचों देश दुनिया के 3.6 अरब लोगों यानी करीब आधी आबादी की नुमाइंदगी करते हैं और उनका कुल जीडीपी 16.6 खरब अमेरिकी डॉलर है. आतंकवाद से प्रभावी तौर पर निपटने के लिए कॉम्प्रीहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआईटी) पर संयुक्त राष्ट्र में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत ब्रिक्स देशों के बीच एकता की पुरजोर वकालत कर सकता है.

सीसीआईटी की पहल भारत की ओर से की गई थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच आतंकवाद की परिभाषा को लेकर मतभेद के कारण यह फंसा पड़ा है. आतंकवाद से मुकाबले के मामले में ब्रिक्स देशों के बीच ज्यादा सहयोग पर भी भारत जोर दे सकता है.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कगोवा पहुंच चुके हैं. आईएनएस हंसा बेस पर मोदी की अगवानी राज्य की राज्यपाल मृदुला सिन्हा, मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर, उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा और अन्य ने की. प्रधानमंत्री बेनाउलिम स्थित पांच सितारा रिजार्ट गये जहां सम्मेलन होना है.

मोदी ने इससे पहले ट्वीट में कहा था, ‘अगले कुछ दिन में, भारत आठवें ब्रिक्स और पहले ब्रिक्स. बिमस्टेक सम्मेलन के लिए वैश्विक नेताओं की मेजबानी करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘मैं प्रमुख वैश्विक एवं क्षेत्रीय चुनौतियों पर चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस के नेताओं से लाभदायक बातचीत करने को लेकर आशान्वित हूं.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस साल ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत मजबूत आर्थिक एवं लोगों के संबंधों पर जोर देता है. इससे हमें बहुत लाभ होगा.’ मोदी ने कहा, ‘भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत कर भारत सम्मानित महसूस करता है जो गोवा में होगा.’ उन्होंने कहा, ‘हम द्विपक्षीय दौरे के लिए ब्राजील के राष्ट्रपति का भी स्वागत करते हैं जो ब्राजील के साथ सहयोग के नये क्षेत्र खोलेगा.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स और बिम्सटेक समूहों के शासनाध्यक्षों और राष्ट्राध्यक्षों के लिए रविवार की रात लक्जरी होटल ‘लीला गोवा’ में राजकीय भोज देंगे. ब्रिक्स-बिम्सटेक शिखर सम्मेलन गोवा के ताज एक्सोटिका में शुरू हो रहा है. इसमें प्रधानमंत्री मोदी सहित 11 देशों के शासनाध्यक्ष और राष्ट्राध्यक्ष दो दिनों तक बैठक करेंगे.

ब्रिक्स के पांच सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. वहीं बिम्सटेक के सात सदस्यों में बांग्लादेश, भारत, म्यामां, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं. लीला होटल के एक प्रवक्ता ने बताया कि राजकीय रात्रिभोज में विशिष्ट भारतीय व्यंजन परोसे जाएंगे.

करीब 75 एकड़ में फैला रिजॉर्ट लीला गोवा मोबोर बीच पर स्थित है. लीला गोवा के महाप्रबंधक श्रीधर नायर ने कहा कि रात्रिभोज में 250 से ज्यादा गणमान्य लोग भाग लेंगे. इस दौरान भारत के मशहूर कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश करेंगे